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अभी यहाँ…

अभी यहाँ…

अभी यहाँ मैं बैठा हूँ अभी यहाँ तुम होती अभी यहाँ समंदर किनारे हम टहल रहे होते और समंदर हमारी धड़कन सुन रहा होता अभी यहाँ ऊपर वो चाँद और… Read more »

किलकारी

किलकारी

यार वो बचपन के दिन ! जब बारिश होती थी और हम भींग जाते थे ! खेलते थे रोज़ नए खेल दौड़ते हँसते उछल कूदते घास पर लकीर खींच राजा… Read more »

किवाड़

किवाड़

मेरी दस्तकों से बना है ये किवाड़ | इसी के आर-पार जाते हम किसे ढूंढ पाते हैं कहाँ खो जाते हैं ? गूँज खोकर निःशब्द होकर सन्नाटे सा खडा तना… Read more »

बिजली गुल

बिजली गुल

शाम को बिजली गुल और हम हर तरह की बातें अँधेरे में बरामदे में उजाले की बातें राजनीति की बातें वो मिनिस्टर अच्छा नहीं है शायद वो भी काम का… Read more »

स्टेशन पर खड़ी लड़की

स्टेशन पर खड़ी लड़की

स्टेशन पर खड़ी लड़की मेरी क्या लगती थी ? फिर भी क्यों सोचने लगा उसके बारे में क्यों अच्छा दिखना चाहा क्यों लिखी ये कविता ? दो ट्रेन के बीच… Read more »

क्रांति कन्या

क्रांति कन्या

वो क्रन्तिकारी थी मतवारी थी चली जा रही थी इन्कलाब के गाने गाते और हम खुद की आज़ादी के सपनों संग उसके पीछे चले जाते यही लड़की समा गयी थी… Read more »

एक सवाल

एक सवाल

उसने चहकते हुए पुछा- “तो तुम कवि हो किस रस के ? किस छन्द के ? किस ताल के ? किस काल के ?” मैंने कहा- “मै उस समय का… Read more »

असफलता

असफलता

एक प्रतियोगिता है निर्लज्ज की तरह रुके खड़े रहने खड़े खड़े गिरने और फिर कतार तोड़कर पहले मरने की| यही नया दौर है… असफलता का| वैसे भी नंगा नहाता है… Read more »

गाना गाया

गाना गाया

जीवन के इस तरफ उस तरफ का अन्धकार उस तरफ जाने क्या ? आगे बढ़ा मैं रेंगता हुआ दौड़ जीता | इस जीत में शामिल थे मेरे चाहने वाले और… Read more »

चप्पल से लिपटी चाहतें

चप्पल से लिपटी चाहतें

चाहता हूँ एक पुरानी डायरी कविता लिखने के लिए एक कोरा काग़ज़ चित्र बनाने के लिए एक शांत कोना पृथ्वी का गुनगुनाने के लिए | चाहता हूँ नीली – कत्थई… Read more »